- मूल्य वे मानक/पैमाने हैं जिनके आधार पर समाज किसी घटना, परिस्थिति या व्यवहार को
उचित–अनुचित, अच्छा–बुरा, सही–गलत ठहराता है। - मूल्य सामाजिक मनोवृत्ति (Social Attitude) एवं दृष्टिकोण को अभिव्यक्त करते हैं।
- मूल्य देश, काल, संस्कृति, समाज और परिस्थिति के अनुसार परिवर्तित होते रहते हैं।
- इसलिए पाश्चात्य समाजों के मूल्य भारतीय समाज से तथा ग्रामीण–नगरीय–जनजातीय समाजों के मूल्य एक-दूसरे से भिन्न होते हैं।
👉 निष्कर्ष:
मूल्य समाज द्वारा स्वीकृत वे मानक हैं जिनके आधार पर व्यवहार का मूल्यांकन किया जाता है।
2️⃣ मूल्य की परिभाषाएँ (Important Definitions)
🔹 एम. जानसन के अनुसार
- मूल्य वह मान (Standard) है जिसके द्वारा वस्तुओं, परिस्थितियों एवं व्यवहारों की
तुलना, स्वीकृति या अस्वीकृति की जाती है।
🔹 आर. के. मुखर्जी के अनुसार
- मूल्य समाज द्वारा मान्यता प्राप्त इच्छाएँ एवं लक्ष्य हैं
जो समाजीकरण/सीखने की प्रक्रिया से व्यक्ति के व्यक्तित्व में आंतरिकीकृत हो जाते हैं
और मानक एवं आदर्श का रूप ले लेते हैं।
👉 परीक्षा बिंदु:
- मूल्य सामाजिक रूप से स्वीकृत, सीखे हुए तथा आंतरिकीकृत होते हैं।
3️⃣ मूल्यों की प्रमुख विशेषताएँ
- मूल्य अमूर्त होते हैं।
- मूल्य व्यवहार को दिशा देते हैं।
- मूल्य सामाजिक एवं सांस्कृतिक होते हैं।
- मूल्य अर्जित (Achieved) होते हैं, जन्मजात नहीं।
- मूल्य अपेक्षाकृत स्थायी होते हैं।
- मूल्य व्यक्तित्व एवं चरित्र का आधार होते हैं।
- मूल्य समाज पर बाध्यकारी प्रभाव डालते हैं।
4️⃣ मूल्यों का वर्गीकरण (Classification of Values)
(क) पेरी के अनुसार
- नकारात्मक मूल्य
- सकारात्मक मूल्य
- विकासवादी मूल्य
- वास्तविक मूल्य
(ख) प्रो. गोलाइटली के अनुसार
- अनिवार्य मूल्य – जैसे: चोरी न करना
- व्यावहारिक मूल्य – जैसे: बड़ों का सम्मान
(ग) स्प्रैंगर के अनुसार (TET में अत्यंत महत्वपूर्ण)
- सैद्धान्तिक मूल्य
- आर्थिक मूल्य
- कलात्मक मूल्य
- सामाजिक मूल्य
- राजनैतिक मूल्य
- धार्मिक मूल्य
(घ) प्रो. एम. केस के अनुसार
- सावयवी मूल्य
- विशिष्ट मूल्य
- सामाजिक मूल्य
- सामाजिक-सांस्कृतिक मूल्य
5️⃣ सार्वभौमिक मानवीय मूल्य (Universal Human Values)
वे मूल्य जो लगभग सभी समाजों में समान रूप से स्वीकार्य हैं:
- अहिंसा
- सत्य (सत्यम)
- शिवम् (कल्याण एवं करुणा)
- सुन्दरम् (सौंदर्यबोध)
- प्रेम
- ईमानदारी
- समानता, स्वतंत्रता एवं बंधुत्व
- न्याय
- सेवा
- देश-प्रेम
- नैतिकता
- सहयोग, सहनशीलता, क्षमा, संयम
👉 परीक्षा टिप:
- अहिंसा, सत्य और प्रेम – सबसे अधिक पूछे जाने वाले सार्वभौमिक मूल्य।
6️⃣ मूल्यों की प्राप्ति कैसे होती है? (How are Values Acquired?)
🔹 1. मूल्य जन्मजात नहीं होते
- मूल्य सामाजिक-सांस्कृतिक प्रक्रिया का परिणाम हैं।
🔹 2. समाजीकरण (Socialization)
- मूल्य सामाजिक अन्तःक्रिया के माध्यम से आत्मसात होते हैं।
🔹 3. परिवार की भूमिका
- परिवार प्राथमिक समूह है।
- उचित–अनुचित, सही–गलत का प्रथम ज्ञान परिवार से मिलता है।
🔹 4. विद्यालय की भूमिका
- अनुशासन, सहयोग, समानता, सहिष्णुता जैसे मूल्य विकसित करता है।
🔹 5. समाज एवं संस्कृति
- संस्कृति आदर्श एवं मानक प्रस्तुत करती है।
- मूल्य सांस्कृतिक संरचना का अंग होते हैं।
7️⃣ मूल्य निर्धारण के प्रमुख कारक
- मनोवैज्ञानिक कारक – मनोवृत्ति, प्रेरणा
- सामाजिक कारक – सामाजिक प्रत्यक्षीकरण, अन्तःक्रिया
- सांस्कृतिक कारक – परम्पराएँ, मान्यताएँ
- सुझाव एवं अनुकरण
8️⃣ मूल्य: प्रदत्त नहीं, अर्जित
- मूल्य Ascribed नहीं, बल्कि Achieved होते हैं।
- व्यक्ति सीखने, अनुभव और समाजीकरण से मूल्य अर्जित करता है।
9️⃣ समाज और मूल्य (Durkheim का दृष्टिकोण)
- मूल्य सामाजिक तथ्य हैं।
- मूल्य समाज की सामूहिक चेतना की अभिव्यक्ति हैं।
- मूल्य व्यक्ति पर बाध्यता डालते हैं।
- सामाजिक निन्दा से बचने हेतु व्यक्ति मूल्यों का पालन करता है।
🔟 TET/CTET के लिए 1–2 लाइन उत्तर
- मूल्य समाज द्वारा स्वीकृत वे मानक हैं जिनके आधार पर व्यवहार को सही या गलत ठहराया जाता है।
- मूल्य सामाजिक-सांस्कृतिक प्रक्रिया से अर्जित होते हैं, जन्मजात नहीं।
