🌍 वातावरण का अर्थ एवं विशेषताएँ (Meaning & Characteristics of Environment)
1. वातावरण का अर्थ (Meaning of Environment)
आज वातावरण शब्द के स्थान पर अधिकतर पर्यावरण शब्द का प्रयोग किया जाता है।
यदि पर्यावरण शब्द की संधि-विच्छेद के आधार पर व्याख्या करें, तो—
पर्यावरण = परि + आवरण
अर्थात् जो हमें चारों ओर से घेरे हुए है या ढकता है।
👉 इस प्रकार, वातावरण वह समस्त भौतिक, जैविक, सामाजिक एवं सांस्कृतिक परिस्थितियाँ हैं, जो व्यक्ति को चारों ओर से घेरकर उसके जीवन, व्यवहार और व्यक्तित्व के विकास को प्रभावित करती हैं।
बालक के विकास के संदर्भ में वातावरण का विशेष महत्व है, क्योंकि—
- केवल आकर्षण उत्पन्न करने वाली वस्तु वातावरण नहीं कहलाती,
- बल्कि वही वातावरण कहलाता है जो व्यक्तित्व के विकास में सहायक हो।
2. वातावरण की परिभाषाएँ (Definitions of Environment)
(1) एनास्टासी (Anastasi) के अनुसार—
“वातावरण वह प्रत्येक वस्तु है जो व्यक्ति के जीन्स को छोड़कर उसे प्रभावित करती है।”
(2) बोरिंग, लैंगफील्ड एवं वैल्ड (Boring, Langfield and Weld) के अनुसार—
“व्यक्ति का वातावरण उन सभी उत्तेजनाओं का योग है, जिन्हें वह जन्म से मृत्यु तक ग्रहण करता है।”
(A person’s environment consists of the sum total of the stimulation which he receives from his conception until his death.)
(3) वुडवर्थ एवं मार्किस (Woodworth and Marquis) के अनुसार—
“वातावरण में वे सभी बाह्य तत्त्व सम्मिलित हैं, जिन्होंने व्यक्ति को उसके जीवनारम्भ से प्रभावित किया है।”
📌 निष्कर्ष
उपर्युक्त परिभाषाओं से स्पष्ट है कि—
व्यक्ति के विकास, व्यवहार और समायोजन को प्रभावित करने वाली सभी बाह्य परिस्थितियाँ एवं उत्तेजनाएँ वातावरण कहलाती हैं।
3. वातावरण की उपयोगिता (Utility of Environment)
वातावरण की उपयोगिता निम्नलिखित है—
- जीवन रक्षा –
शुद्ध वायु, ऑक्सीजन तथा जीवनदायिनी गैसें प्रदान करता है। - जल चक्र का संतुलन –
वर्षा, नदियाँ, भूजल एवं जलवायु को नियंत्रित करता है। - पोषण चक्र का संरक्षण –
पेड़-पौधों द्वारा ऑक्सीजन का निर्माण एवं कार्बन डाइऑक्साइड का अवशोषण। - जलवायु संतुलन –
तापमान, आर्द्रता और मौसमी संतुलन बनाए रखता है। - प्राकृतिक संसाधनों का स्रोत –
वन, खनिज, जल, ऊर्जा एवं जैव संसाधन उपलब्ध कराता है। - जैव विविधता का संरक्षण –
जीव-जंतुओं एवं वनस्पतियों को प्राकृतिक आवास प्रदान करता है। - मानव जीवन पर प्रभाव –
स्वास्थ्य, कृषि, उद्योग, रोजगार एवं जीवन-स्तर को प्रभावित करता है।
4. वातावरण की विशेषताएँ (Characteristics of Environment)
1. सर्वव्यापकता
वातावरण सर्वत्र विद्यमान है और प्रत्येक व्यक्ति को प्रभावित करता है।
2. गतिशीलता
वातावरण स्थिर नहीं होता, बल्कि समय, स्थान और परिस्थितियों के अनुसार बदलता रहता है।
3. बहुआयामी स्वरूप
इसमें भौतिक, जैविक, सामाजिक, सांस्कृतिक और मनोवैज्ञानिक सभी तत्व सम्मिलित होते हैं।
4. व्यक्ति को प्रभावित करने की क्षमता
वातावरण व्यक्ति के—
- शारीरिक
- मानसिक
- सामाजिक
- नैतिक
विकास को प्रभावित करता है।
5. विकास में सहायक
अनुकूल वातावरण बालक के सर्वांगीण विकास में सहायक होता है।
6. बाह्य एवं आंतरिक प्रभाव
वातावरण बाहरी परिस्थितियों के साथ-साथ व्यक्ति की आंतरिक प्रतिक्रियाओं से भी जुड़ा होता है।
7. सीखने एवं व्यवहार पर प्रभाव
वातावरण के माध्यम से ही व्यक्ति सीखता है, अनुभव प्राप्त करता है और व्यवहार करता है।
5. परीक्षा-उपयोगी एक पंक्ति में
✔ वातावरण = व्यक्ति को चारों ओर से प्रभावित करने वाली परिस्थितियाँ
✔ जीन्स को छोड़कर सभी बाह्य प्रभाव वातावरण में आते हैं
✔ अनुकूल वातावरण = उत्तम विकास
✔ बालक के व्यक्तित्व निर्माण में वातावरण की केंद्रीय भूमिका
