प्रायोजना विधि (Project Method)
(विज्ञान शिक्षण – CTET / REET / RPSC / TET हेतु अति महत्वपूर्ण)

👨🏫 1. प्रायोजना विधि के जन्मदाता
- जन्मदाता: विलियम हैनरी किलपैट्रिक
- वे जॉन ड्यूवी के शिष्य थे।
- यह विधि प्रगतिशील शिक्षा दर्शन पर आधारित है।
📖 2. प्रायोजना विधि की परिभाषाएँ
- किलपैट्रिक के अनुसार – “प्रोजेक्ट वह सहृदय, सौद्देश्यपूर्ण कार्य है जो पूर्ण संलग्नता से सामाजिक वातावरण में किया जाता है।”
- प्रो. स्टीवेंसन के अनुसार – “प्रोजेक्ट एक समस्यामूलक कार्य है जो स्वाभाविक स्थिति में पूरा किया जाता है।”
- पारकर के अनुसार – “क्रिया की ऐसी इकाई जिसके नियोजन एवं क्रियान्वयन के लिए छात्र स्वयं उत्तरदायी हो।”
🎯 3. प्रायोजना विधि का स्वरूप
- इस विधि में कोई कार्य समस्या के रूप में बालकों के सामने प्रस्तुत किया जाता है।
- बालक उस समस्या को स्वयं सुलझाने का प्रयास करते हैं।
- प्रोजेक्ट विद्यार्थियों के वास्तविक जीवन से संबंधित होते हैं और स्वाभाविक परिस्थितियों में पूरे किए जाते हैं।
🔄 4. प्रायोजना विधि के चरण
- परिस्थिति उत्पन्न करना
- बालकों की स्वतंत्रता सबसे महत्त्वपूर्ण होती है।
- प्रायोजना का चुनाव
- प्रोजेक्ट के चयन में शिक्षक की मार्गदर्शक भूमिका महत्वपूर्ण होती है।
- प्रायोजना का नियोजन
- प्रोजेक्ट का कार्यक्रम/योजना तैयार की जाती है।
- प्रायोजना का क्रियान्वयन
- योजना के अनुसार कार्य छात्रों को आवंटित किए जाते हैं।
- प्रायोजना का मूल्यांकन
- कार्य पूर्ण होने पर छात्र व शिक्षक मिलकर सफलता का मूल्यांकन करते हैं।
- प्रायोजना का अभिलेख निर्माण
- प्रायोजना से संबंधित सभी तथ्यों, निष्कर्षों और अनुभवों का लेखा-जोखा।
✅ 5. प्रायोजना विधि के गुण
- यह मनोवैज्ञानिक सिद्धांतों पर आधारित विधि है।
- छात्रों को स्वतंत्र रूप से सोचने, निरीक्षण करने और कार्य करने का अवसर मिलता है।
- गतिविधियाँ सामाजिक वातावरण में होती हैं, जिससे सामाजिकता का विकास होता है।
- छात्र स्वयं करके सीखते हैं, इसलिए ज्ञान स्थायी होता है।
- प्रायोजना का चयन करते समय छात्रों की रुचि, क्षमता और मनोभावों का ध्यान रखा जाता है।
❌ 6. प्रायोजना विधि के दोष
- सभी प्रकरणों का अध्ययन इस विधि से संभव नहीं।
- प्रशिक्षित अध्यापक की आवश्यकता होती है।
- यह खर्चीली विधि है।
- इसमें अधिक समय लगता है।
📝 परीक्षा हेतु एक नज़र में
- जन्मदाता: विलियम हैनरी किलपैट्रिक
- आधार: समस्या + वास्तविक जीवन + स्वाभाविक परिस्थितियाँ
- मुख्य गुण: Learning by Doing, Social Learning
- सीमा: समय व खर्च




