लोकतांत्रिक एवं राष्ट्रवादी क्रान्तियाँ (सन् 1600-1900) – कक्षा 9 कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान
परिचय: 17वीं शताब्दी से 19वीं शताब्दी तक यूरोप और अमेरिका में हुए राजनीतिक परिवर्तनों ने निरंकुश राजशाही को समाप्त किया और लोकतंत्र एवं राष्ट्रवाद (Nationalism) की नींव रखी। ये क्रांतियाँ प्रबोधन (Enlightenment) के विचारों—स्वतंत्रता, समानता, और संप्रभुता—का प्रत्यक्ष परिणाम थीं।
1. लोकतांत्रिक क्रान्तियाँ (Democratic Revolutions)
ये क्रांतियाँ मुख्य रूप से शासन की प्रकृति को बदलने और नागरिकों को राजनीतिक अधिकार देने पर केंद्रित थीं।
1.1. गौरवशाली क्रांति (Glorious Revolution, 1688, इंग्लैंड)
- स्वरूप: यह क्रांति बिना रक्तपात के हुई थी।
- परिणाम: इस क्रांति ने इंग्लैंड में राजा की निरंकुश शक्ति को समाप्त किया।
- महत्व: इसने संसद (Parliament) को राजा से अधिक शक्तिशाली बना दिया और संवैधानिक राजतंत्र (Constitutional Monarchy) की स्थापना की। इसने नागरिक अधिकारों की रक्षा के लिए ‘बिल ऑफ राइट्स’ (1689) को आधार प्रदान किया।
1.2. अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम (American War of Independence, 1776)
- कारण: ब्रिटिश संसद द्वारा अमेरिकी उपनिवेशों पर ‘प्रतिनिधित्व नहीं तो कराधान नहीं’ (“No Taxation Without Representation”) के सिद्धांत के विरुद्ध लगाए गए कर (Taxes)।
- नेतृत्व: जॉर्ज वाशिंगटन।
- महत्व:
- इसने 1787 में विश्व के पहले लिखित संविधान (Written Constitution) की स्थापना की।
- इसने नागरिकों के प्राकृतिक और अहरणीय अधिकारों (Natural and Inalienable Rights) को सुनिश्चित किया।
- यह यूरोप में होने वाली फ्रांसीसी क्रांति के लिए प्रेरणा स्रोत बना।
1.3. फ्रांसीसी क्रान्ति (French Revolution, 1789)
- कारण:
- निरंकुश राजशाही (राजा लुई XVI)।
- समाज का तीन एस्टेट्स में विभाजन, जहाँ तीसरे एस्टेट (सामान्य जनता) पर ही सारा कर-भार था।
- प्रबोधन के विचार (रूसो, मॉन्तेस्क्यू)।
- नारे: स्वतंत्रता (Liberté), समानता (Égalité), बंधुत्व (Fraternité)।
- महत्व:
- इसने राष्ट्र-राज्य (Nation-State) की अवधारणा को जन्म दिया और संप्रभुता राजा से हटकर नागरिकों के हाथों में आ गई।
- इसने पूरे यूरोप और दुनिया को लोकतंत्र के विचारों से परिचित कराया।
2. राष्ट्रवादी क्रान्तियाँ और राष्ट्र-राज्यों का उदय (19वीं शताब्दी)
19वीं शताब्दी में, लोग जाति, संस्कृति और साझा इतिहास के आधार पर एक होकर राष्ट्र-राज्य बनाने की माँग करने लगे।
2.1. राष्ट्रवाद की अवधारणा
- परिभाषा: एक साझा पहचान, इतिहास, संस्कृति और भाषा के आधार पर लोगों का यह विश्वास कि वे एक ही राष्ट्र (Nation) से संबंधित हैं और उन्हें एक संप्रभु सरकार के अधीन रहना चाहिए।
2.2. जर्मनी का एकीकरण (Unification of Germany, 1871)
- पूर्व स्थिति: जर्मनी 39 छोटे-बड़े राज्यों के समूह में बंटा हुआ था।
- नेतृत्व: प्रशिया के मंत्री-राष्ट्रपति ओटो वॉन बिस्मार्क, जिन्हें “जर्मनी के एकीकरण का वास्तुकार” कहा जाता है।
- रणनीति: ‘रक्त और लौह’ (Blood and Iron) की नीति का पालन किया गया, जिसमें सैन्य शक्ति का उपयोग किया गया।
- परिणाम: जर्मनी एक एकीकृत राष्ट्र-राज्य बना।
2.3. इटली का एकीकरण (Unification of Italy, 1871)
- पूर्व स्थिति: इटली भी सात राज्यों में बंटा हुआ था, जिनमें से केवल एक (सार्डिनिया-पीडमोंट) पर इतालवी राजघराने का शासन था।
- प्रमुख नेता:
- काउंट कैमिलो दे कावूर: राजनीतिक और कूटनीतिक प्रमुख।
- ग्यूसेप गैरीबाल्डी: स्वयंसेवकों (“रेड शर्ट्स”) के साथ दक्षिणी इटली में संघर्ष किया।
- ग्यूसेप मेजिनी: युवा इटली आंदोलन के माध्यम से राष्ट्रवादी भावनाओं को जगाया।
- परिणाम: इटली एक संयुक्त और स्वतंत्र राष्ट्र-राज्य बना।
3. लोकतांत्रिक एवं राष्ट्रवादी क्रान्तियों का प्रभाव
- निरंकुशता का अंत: इन क्रांतियों ने यूरोप और अमेरिका में निरंकुश राजतंत्रों की समाप्ति या शक्ति को सीमित करने में निर्णायक भूमिका निभाई।
- लोकतंत्र की नींव: इसने संविधानवाद, मताधिकार, कानून के शासन (Rule of Law) और नागरिक अधिकारों के सिद्धांतों को स्थापित किया।
- राष्ट्र-राज्य का प्रसार: ‘राष्ट्र-राज्य’ आधुनिक राजनीतिक संगठन का प्राथमिक रूप बन गया, जिससे बहु-राष्ट्रीय साम्राज्यों (जैसे ऑस्ट्रिया-हंगरी और ओटोमन साम्राज्य) का पतन हुआ।
- भारतीय राष्ट्रवाद पर प्रभाव: फ्रांसीसी क्रांति के विचार (स्वतंत्रता, समानता) और अमेरिकी स्वतंत्रता संग्राम ने 19वीं शताब्दी के भारतीय समाज सुधारकों और राष्ट्रवादी नेताओं को प्रेरित किया।
