भारत की नदियाँ एवं अपवाह प्रणाली (कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान)
1. अपवाह प्रणाली का परिचय (Introduction to Drainage System)
- अपवाह (Drainage): एक विशिष्ट क्षेत्र की नदी प्रणाली।
- अपवाह द्रोणी (Drainage Basin) / नदी द्रोणी: वह क्षेत्र जिसे एक मुख्य नदी और उसकी सहायक नदियाँ मिलकर अपवाहित (Drain) करती हैं।
- जल विभाजक (Water Divide): कोई भी ऊँचा क्षेत्र, जैसे पर्वत या उच्च भूमि, जो दो पड़ोसी अपवाह द्रोणियों को एक-दूसरे से अलग करता है।
- उदाहरण: अंबाला शहर सिंधु और गंगा नदी तंत्र के बीच जल विभाजक के रूप में कार्य करता है।
2. भारतीय अपवाह तंत्र का वर्गीकरण (Classification of Indian Drainage System)
भारतीय नदियों को मुख्य रूप से दो प्रमुख समूहों में वर्गीकृत किया गया है:
2.1. हिमालयी नदियाँ (The Himalayan Rivers)
- प्रकृति: ये सदावाहिनी (Perennial) होती हैं, यानी इनमें पूरे वर्ष पानी रहता है।
- जल स्रोत: इन्हें वर्षा के साथ-साथ पिघलने वाली बर्फ (Glaciers) से भी पानी मिलता है।
- मार्ग: ये अपने उद्गम से लेकर समुद्र तक का लंबा मार्ग तय करती हैं।
- भू-आकृतियाँ: ये नदियाँ गहरे गॉर्ज (Gorges), V-आकार की घाटियाँ, विसर्प (Meanders), ऑक्स-बो झीलें (गोखुर झीलें) और अपने मुहाने पर बड़े डेल्टा का निर्माण करती हैं।
2.2. प्रायद्वीपीय नदियाँ (The Peninsular Rivers)
- प्रकृति: ये मुख्य रूप से मौसमी (Seasonal) होती हैं, क्योंकि इनका प्रवाह वर्षा पर निर्भर करता है।
- जल स्रोत: केवल मानसून की वर्षा। ग्रीष्मकाल में इनका जल स्तर कम हो जाता है या ये सूख जाती हैं।
- मार्ग: ये हिमालयी नदियों की तुलना में छोटी और उथली होती हैं।
- भू-आकृतियाँ: ये नदियाँ डेल्टा भी बनाती हैं (जैसे गोदावरी) लेकिन इनमें विसर्प (Meanders) और गोखुर झीलें कम पाई जाती हैं।
3. प्रमुख हिमालयी नदी तंत्र (Major Himalayan River Systems)
भारत में तीन प्रमुख हिमालयी नदी तंत्र हैं:
(A) सिंधु नदी तंत्र (The Indus River System)
- उद्गम: तिब्बत में मानसरोवर झील के पास।
- प्रवाह: यह भारत में लद्दाख के रास्ते प्रवेश करती है, फिर जम्मू और कश्मीर, हिमाचल और पंजाब में बहती है।
- सहायक नदियाँ: सतलुज, व्यास, रावी, चेनाब और झेलम। ये नदियाँ पाकिस्तान में मीठनकोट के पास सिंधु से मिलती हैं।
- समाप्ति: यह अंततः कराची के पूर्व में अरब सागर में गिरती है।
- सिंधु जल संधि (1960): भारत इस नदी तंत्र के कुल जल का केवल 20% उपयोग कर सकता है, जिसका उपयोग पंजाब, हरियाणा और राजस्थान के दक्षिणी-पश्चिमी भागों में किया जाता है।
(B) गंगा नदी तंत्र (The Ganga River System)
- उद्गम: गंगा का मुख्य स्रोत भागीरथी है, जो उत्तराखंड के गंगोत्री ग्लेशियर से निकलती है।
- नामकरण: यह देवप्रयाग में अलकनंदा से मिलकर ‘गंगा’ कहलाती है।
- लंबाई: भारत की सबसे लंबी नदी (लगभग 2,500 किमी से अधिक)।
- सहायक नदियाँ (उत्तर): यमुना (जो प्रयागराज में गंगा से मिलती है), घाघरा, गंडक और कोसी।
- सहायक नदियाँ (दक्षिण): चंबल, बेतवा, सोन (ये प्रायद्वीपीय उच्च भूमि से निकलती हैं)।
- प्रवाह: यह पश्चिम बंगाल में फरक्का तक बहती है, जहाँ यह दो वितरिकाओं में बँट जाती है:
- भागीरथी-हुगली (वितरिका): दक्षिण की ओर बहती हुई बंगाल की खाड़ी में।
- मुख्य धारा: बांग्लादेश में प्रवेश करती है, जहाँ इसे पद्मा कहा जाता है।
- डेल्टा: बांग्लादेश में पद्मा, ब्रह्मपुत्र (जहाँ इसे जमुना कहते हैं) से मिलकर मेघना कहलाती है, और दुनिया के सबसे बड़े सुंदरबन डेल्टा का निर्माण करती है।
(C) ब्रह्मपुत्र नदी तंत्र (The Brahmaputra River System)
- उद्गम: तिब्बत में मानसरोवर झील के पूर्व में (सिंधु और सतलुज के बहुत करीब)।
- तिब्बत में नाम: सांगपो (Tsangpo) के नाम से जानी जाती है, जहाँ यह कम वर्षा के कारण कम गाद लेकर चलती है।
- भारत में प्रवेश: यह अरुणाचल प्रदेश में दिहांग गॉर्ज के माध्यम से प्रवेश करती है, जहाँ इसे दिहांग कहा जाता है।
- सहायक नदियाँ: दिबांग, लोहित और केनुला।
- विशेषता: भारत में यह विशाल गाद और वर्षा के कारण एक गुम्फित नदी (Braided River) के रूप में बहती है और असम में माजुली (Majuli) जैसे नदी द्वीपों का निर्माण करती है।
4. प्रमुख प्रायद्वीपीय नदी तंत्र (Major Peninsular River Systems)
प्रायद्वीपीय नदियाँ ढाल के आधार पर दो भागों में बँटी हैं: पूर्व की ओर बहने वाली (बंगाल की खाड़ी में) और पश्चिम की ओर बहने वाली (अरब सागर में)।
4.1. पश्चिम की ओर बहने वाली नदियाँ (अरब सागर में)
- नर्मदा नदी:
- उद्गम: मध्य प्रदेश में अमरकंटक की पहाड़ियाँ।
- विशेषता: यह एक भ्रंश घाटी (Rift Valley) में बहती है।
- भू-आकृतियाँ: जबलपुर के पास धुंआधार जलप्रपात का निर्माण करती है।
- तापी (ताप्ती) नदी:
- उद्गम: मध्य प्रदेश के सतपुड़ा श्रृंखला में बैतूल जिले से।
- विशेषता: यह भी नर्मदा के समानांतर एक भ्रंश घाटी में बहती है।
- मुहाना: दोनों नदियाँ (नर्मदा और तापी) ज्वारनदमुख (Estuaries) का निर्माण करती हैं, न कि डेल्टा का।
4.2. पूर्व की ओर बहने वाली नदियाँ (बंगाल की खाड़ी में)
- गोदावरी नदी:
- उद्गम: महाराष्ट्र के नासिक जिले में।
- विशेषता: यह प्रायद्वीपीय भारत की सबसे लंबी नदी है। इसलिए इसे ‘दक्षिण गंगा’ भी कहा जाता है।
- अपवाह क्षेत्र: यह महाराष्ट्र, मध्य प्रदेश, ओडिशा और आंध्र प्रदेश को अपवाहित करती है।
- डेल्टा: बंगाल की खाड़ी में गिरने से पहले एक बड़ा डेल्टा बनाती है।
- महानदी:
- उद्गम: छत्तीसगढ़ की उच्च भूमि से।
- प्रवाह: ओडिशा से होते हुए बंगाल की खाड़ी में गिरती है।
- कृष्णा नदी:
- उद्गम: महाराष्ट्र में महाबलेश्वर के पास एक झरने से।
- सहायक नदियाँ: तुंगभद्रा, कोयना, घाटप्रभा।
- कावेरी नदी:
- उद्गम: पश्चिमी घाट की ब्रह्मगिरी श्रृंखला से।
- विशेषता: यह नदी गर्मियों में कम और सर्दियों में अधिक (लौटते मानसून से) वर्षा प्राप्त करती है, इसलिए इसमें पूरे साल पानी का प्रवाह बना रहता है।
5. झीलें (Lakes)
- झील का महत्व: ये जल-विद्युत उत्पादन, पर्यटन और जलवायु को नियंत्रित करने में महत्वपूर्ण हैं।
- निर्माण के आधार पर प्रकार:
- मीठे पानी की झीलें (Freshwater Lakes): हिमालयी क्षेत्र में पाई जाती हैं। इनका निर्माण मुख्य रूप से हिमानी (Glaciers) की क्रिया से होता है।
- उदाहरण: वुलर झील (भारत की सबसे बड़ी मीठे पानी की झील), डल झील, नैनीताल (सभी जम्मू और कश्मीर में)।
- खारे पानी की झीलें (Saltwater Lakes):
- उदाहरण: चिल्का झील (ओडिशा में, भारत की सबसे बड़ी खारे पानी की झील), सांभर झील (राजस्थान)।
- गोखुर झीलें (Ox-Bow Lakes): विसर्प (Meander) का कट जाने से बनती हैं (जैसे गंगा के मैदानों में)।
- मीठे पानी की झीलें (Freshwater Lakes): हिमालयी क्षेत्र में पाई जाती हैं। इनका निर्माण मुख्य रूप से हिमानी (Glaciers) की क्रिया से होता है।
6. नदियों का अर्थव्यवस्था में महत्व
- कृषि: नदियाँ सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराती हैं, जो भारत जैसे कृषि प्रधान देश के लिए महत्वपूर्ण है।
- बिजली उत्पादन: नदियाँ जलविद्युत उत्पादन का मुख्य स्रोत हैं।
- परिवहन: ये नौगम्यता (Navigation) और अंतर्राज्यीय व्यापार के लिए परिवहन का सस्ता साधन प्रदान करती हैं।
- पर्यटन: ये पर्यटन को बढ़ावा देती हैं।
- जीवनदायिनी: भारत की अधिकांश आबादी नदी घाटियों में निवास करती है, जो उनके जीवन और आजीविका का आधार है।
