भारत की जलवायु (कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान)
1. परिचय: जलवायु बनाम मौसम
| विशेषता | जलवायु (Climate) | मौसम (Weather) |
|---|---|---|
| परिभाषा | किसी बड़े क्षेत्र में लंबी अवधि (30 वर्ष से अधिक) के लिए मौसम की अवस्थाओं और भिन्नताओं का योग। | किसी विशिष्ट समय पर एक छोटे से क्षेत्र के वायुमंडल की तात्कालिक अवस्था। |
| उदाहरण | भारत की जलवायु मानसूनी है। | आज का मौसम गर्म और आर्द्र है। |
- भारत की जलवायु का प्रकार: भारत की जलवायु को मानसूनी जलवायु कहा जाता है। ‘मानसून’ शब्द अरबी शब्द ‘मौसिम’ से लिया गया है, जिसका अर्थ है मौसम (Season)।
2. जलवायु को नियंत्रित करने वाले कारक (Factors Affecting Climate)
भारत की जलवायु को मुख्य रूप से छह कारक प्रभावित करते हैं:
| कारक | कैसे प्रभावित करता है |
|---|---|
| 1. अक्षांश (Latitude) | कर्क रेखा (23.5° N) भारत के लगभग बीच से गुजरती है। कर्क रेखा के दक्षिण का भाग उष्णकटिबंधीय (Tropical) और उत्तर का भाग उपोष्णकटिबंधीय (Sub-tropical) जलवायु वाला होता है। |
| 2. ऊँचाई (Altitude) | ऊँचाई बढ़ने के साथ तापमान घटता जाता है (6.5°C प्रति 1000 मी.)। हिमालय ऊँचाई के कारण ठंडी हवाओं को भारत में आने से रोकता है। |
| 3. वायु दाब एवं पवन तंत्र (Pressure & Wind System) | यह हवा की गति और दिशा को प्रभावित करता है, जिससे वर्षा का वितरण प्रभावित होता है। इसमें उपरी वायु परिसंचरण (Jet Stream) और पश्चिमी विक्षोभ शामिल हैं। |
| 4. समुद्र से दूरी (Distance from Sea) | समुद्र का प्रभाव तटीय क्षेत्रों में समकारी (Equable or moderate) जलवायु बनाए रखता है, जबकि आंतरिक भागों में विषम (Extreme) जलवायु (गर्मियों में बहुत गर्म, सर्दियों में बहुत ठंडा) होती है। |
| 5. महासागरीय धाराएँ (Ocean Currents) | तट के पास बहने वाली गर्म या ठंडी धाराएँ तटीय क्षेत्रों के तापमान को प्रभावित करती हैं। |
| 6. उच्चावच (Relief) | पहाड़ों की दिशा और ऊँचाई हवाओं की दिशा को प्रभावित करती है, जिससे वर्षा का वितरण (जैसे, पश्चिमी घाट के पश्चिमी ढलान पर भारी वर्षा) प्रभावित होता है। |
3. मानसून की प्रकृति (The Nature of Monsoon)
- मानसून का फटना (Burst of Monsoon): सामान्य वर्षा में अचानक वृद्धि, जो कई दिनों तक जारी रहती है। यह मानसून के आगमन का संकेत है।
- मानसून का विच्छेदन (Break in Monsoon): मानसून में शुष्क और आर्द्र क्रम होते हैं। कुछ हफ्तों तक वर्षा का न होना ‘मानसून का विच्छेदन’ कहलाता है। यह मुख्य रूप से मानसूनी गर्त (Monsoon Trough) की स्थिति में बदलाव के कारण होता है।
3.1. मानसून को प्रभावित करने वाले वैश्विक कारक
- एल-नीनो (El-Nino): यह प्रशांत महासागर में पेरू के तट के पास अस्थायी रूप से गर्म महासागरीय धारा का विकास है। यह अक्सर भारत में कमजोर मानसून और सूखे का कारण बनता है।
- ला-नीना (La-Nina): यह एल-नीनो के विपरीत, प्रशांत महासागर में ठंडी महासागरीय धारा का विकास है। यह अक्सर भारत में मजबूत मानसून और अच्छी वर्षा का कारण बनता है।
4. भारत में ऋतुएँ (Seasons in India)
भारतीय मौसम विज्ञान विभाग के अनुसार, भारत में चार प्रमुख ऋतुएँ हैं:
4.1. शीत ऋतु (The Cold Weather Season) – (मध्य नवंबर से फरवरी)
- तापमान: उत्तर भारत में तापमान ठंडा रहता है, और दक्षिण की ओर घटता जाता है।
- पवनें: उत्तर-पूर्वी व्यापारिक पवनें (North-East Trade Winds) चलती हैं, जो भूमि से समुद्र की ओर बहने के कारण शुष्क होती हैं।
- वर्षा:
- उत्तर भारत: पश्चिमी विक्षोभ (Western Disturbances) के कारण थोड़ी वर्षा होती है, जो गेहूँ की फसल के लिए उपयोगी है।
- तमिलनाडु तट: उत्तर-पूर्वी मानसूनी पवनें, बंगाल की खाड़ी से नमी लेकर यहाँ लौटते हुए (Retreating Monsoon) वर्षा करती हैं।
4.2. ग्रीष्म ऋतु (The Hot Weather Season) – (मार्च से मई)
- तापमान: तापमान बढ़ता है और वायु दाब घटता है।
- लू (Loo): यह उत्तरी मैदानों में चलने वाली गर्म, शुष्क पवनें हैं, जो घातक हो सकती हैं।
- पूर्वा-मानसून वर्षा:
- काल बैसाखी (Kal Baisakhi): बंगाल और असम में आने वाले तूफान।
- मैंगो शावर (Mango Shower): केरल और कर्नाटक में होने वाली वर्षा, जो आमों को जल्दी पकने में मदद करती है।
4.3. वर्षा ऋतु (The Advancing Monsoon Season) – (जून से सितंबर)
- उत्पत्ति: दक्षिण-पूर्वी व्यापारिक पवनें विषुवत रेखा को पार करके भारतीय उपमहाद्वीप की ओर बढ़ती हैं, इन्हें दक्षिण-पश्चिम मानसून कहा जाता है।
- पवनें: ये पवनें समुद्र से आर्द्रता लेकर भारत में प्रवेश करती हैं और वर्षा करती हैं।
- दो शाखाएँ:
- अरब सागर शाखा: यह पश्चिमी घाट, मुंबई और मध्य भारत में वर्षा करती है।
- बंगाल की खाड़ी शाखा: यह अंडमान-निकोबार द्वीप समूह, उत्तर-पूर्वी राज्यों और गंगा के मैदानों में वर्षा करती है।
- विश्व में सर्वाधिक वर्षा: मेघालय में स्थित मासिनराम (Mawsynram) दुनिया में सबसे अधिक वर्षा प्राप्त करने वाला स्थान है।
4.4. लौटते हुए मानसून या संक्रमण ऋतु (The Retreating Monsoon Season) – (अक्टूबर-नवंबर)
- तापमान: मानसून गर्त दक्षिण की ओर खिसकता है, जिससे उत्तरी मैदानों में मानसून की पवनें कमजोर पड़ जाती हैं और लौटनी शुरू कर देती हैं।
- मौसम: मौसम साफ होता है और तापमान बढ़ जाता है। उच्च आर्द्रता और उच्च तापमान के कारण ‘अक्टूबर हीट’ (दिन के समय उमस भरी गर्मी) की स्थिति बनती है।
- वर्षा: लौटते हुए मानसून से तमिलनाडु के तट पर भारी वर्षा होती है, जो इस क्षेत्र में सर्दियों की वर्षा का मुख्य स्रोत है।
5. जलवायु का मानव जीवन पर प्रभाव
- भारत में कृषि (विशेषकर धान), त्यौहार, और यहाँ तक कि लोगों की जीवनशैली भी मानसून पर निर्भर करती है।
- वर्षा की अनियमितता और वितरण की भिन्नता भारत की कृषि अर्थव्यवस्था के लिए एक बड़ी चुनौती है।
