उत्तर का विशाल मैदान- कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान
1. सामान्य परिचय और निर्माण
- स्थान: यह विशाल मैदान हिमालय पर्वत के ठीक दक्षिण में स्थित है, जो उत्तर भारत के एक बड़े हिस्से को कवर करता है।
- निर्माण: इसका निर्माण तीन प्रमुख नदी प्रणालियों – सिंधु, गंगा और ब्रह्मपुत्र तथा उनकी सहायक नदियों द्वारा लाए गए जलोढ़ निक्षेपों (Alluvial Deposits) से हुआ है।
- उत्पत्ति: लाखों वर्षों में हिमालय की तलहटी में स्थित एक बड़े भू-अभिनति (Geosyncline) बेसिन में नदियों द्वारा लाए गए मलबे के जमाव से यह मैदान बना है।
2. विस्तार एवं आयाम
- क्षेत्रफल: यह लगभग 7 लाख वर्ग किमी क्षेत्र में फैला हुआ है।
- लंबाई: पश्चिम से पूर्व तक लगभग 2,400 किमी लंबा है।
- चौड़ाई: यह 240 किमी से 320 किमी तक चौड़ा है।
- विशेषता: यह मैदान समतल है, जिसमें बहुत कम ढाल है (ढाल लगभग 1 मीटर प्रति 10 किमी)।
- जलोढ़ की गहराई: जलोढ़ निक्षेपों की गहराई 1000 मीटर से 2000 मीटर तक है।
3. महत्व (Significance)
यह मैदान भारत की अर्थव्यवस्था और सामाजिक संरचना के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है:
- कृषि: जलोढ़ मिट्टी (Alluvial Soil) की उच्च उर्वरता (fertility) के कारण यह भारत का अन्न भंडार कहलाता है।
- जल उपलब्धता: पर्याप्त और बारहमासी (perennial) जल की आपूर्ति (हिमालयी नदियों से) यहाँ होती है।
- जलवायु: कृषि के लिए अनुकूल जलवायु।
- जनसंख्या घनत्व: अनुकूल परिस्थितियों के कारण यह विश्व के सर्वाधिक सघन जनसंख्या वाले क्षेत्रों में से एक है।
4. नदी प्रणालियों के आधार पर विभाजन
उत्तरी मैदान को मोटे तौर पर तीन मुख्य भागों में बाँटा गया है:
- पंजाब का मैदान (Punjab Plains):
- नदी तंत्र: सिंधु नदी और उसकी सहायक नदियाँ (झेलम, चिनाब, रावी, ब्यास, सतलुज) द्वारा निर्मित।
- विस्तार: मैदान का एक बड़ा हिस्सा अब पाकिस्तान में स्थित है।
- विशेषता: सिंधु और उसकी सहायक नदियों के बीच के क्षेत्र को दोआब (Doab) कहते हैं (दो नदियों के बीच की भूमि)।
- गंगा का मैदान (Ganga Plains):
- नदी तंत्र: गंगा नदी और उसकी सहायक नदियों द्वारा निर्मित।
- विस्तार: यह घग्गर नदी से तीस्ता नदी तक फैला है, जिसमें उत्तर प्रदेश, बिहार, हरियाणा, दिल्ली, झारखंड के कुछ हिस्से और पश्चिम बंगाल शामिल हैं।
- ब्रह्मपुत्र का मैदान (Brahmaputra Plains):
- नदी तंत्र: ब्रह्मपुत्र और उसकी सहायक नदियाँ।
- विस्तार: मुख्य रूप से असम राज्य में स्थित है। यह गंगा मैदान के पूर्व में संकीर्ण पट्टी के रूप में फैला है।
5. उच्चावच (Relief) के आधार पर विभाजन
मैदान की भू-आकृतियों और मिट्टी की उम्र में भिन्नता के आधार पर, इसे चार क्षेत्रों में विभाजित किया जाता है:
| क्षेत्र का नाम | स्थान और विवरण | मिट्टी/संरचना | कृषि उपयोगिता |
|---|---|---|---|
| भाबर (Bhabar) | शिवालिक की तलहटी में 8 से 16 किमी चौड़ी पट्टी। | कंकड़ और बजरी का जमाव (कंकरीली)। नदियाँ यहाँ विलुप्त हो जाती हैं। | कृषि के लिए अनुपयुक्त। केवल बड़ी जड़ वाली वनस्पति। |
| तराई (Terai) | भाबर के दक्षिण में स्थित, 15-30 किमी चौड़ा क्षेत्र। | नम, दलदली (Swampy) और घने जंगलों वाला क्षेत्र। नदियाँ फिर से प्रकट होती हैं। | कृषि के लिए साफ किया गया, अब उपजाऊ। जैव विविधता में समृद्ध। |
| भांगर (Bhangar) | नदी बाढ़ के मैदानों से ऊपर स्थित पुराने जलोढ़ (Old Alluvium) से बना। | यहाँ कंकड़ (Calcareous deposits) पाए जाते हैं। मिट्टी कम उपजाऊ होती है। | पुरानी उपजाऊ मिट्टी, लेकिन खादर जितनी नहीं। |
| खादर (Khadar) | नदी के बाढ़ वाले निचले मैदानों में पाया जाता है (बाढ़ का मैदान)। | यह नए और युवा जलोढ़ (New Alluvium) से बना है, जो हर साल जमा होता है। | यह कृषि के लिए सबसे अधिक उपजाऊ है। |
