मानचित्रण और मानचित्र का अध्ययन (कक्षा 9 सामाजिक विज्ञान)
1. परिचय
- मानचित्र (Map): पृथ्वी की सतह या उसके किसी भाग का समतल सतह पर एक पैमाने (स्केल) के अनुसार खींचा गया रेखाचित्र (Drawing) मानचित्र कहलाता है।
- मानचित्रण (Mapping): वह कला या विज्ञान जिसके द्वारा मानचित्र बनाए जाते हैं, मानचित्रण या कार्टोग्राफी कहलाती है।
2. मानचित्र की आवश्यकता और उपयोग
- मानचित्र हमें दुनिया के विभिन्न स्थानों की सटीक स्थिति, दूरी और दिशा जानने में मदद करते हैं।
- भूगोलवेत्ता, सैनिक, पायलट, नाविक, और आम यात्री इनका उपयोग करते हैं।
- ये किसी क्षेत्र की भौतिक विशेषताओं (पहाड़, नदी) और मानव निर्मित विशेषताओं (सड़क, शहर) को दर्शाते हैं।
3. मानचित्र के प्रमुख घटक (Components of a Map)
किसी भी मानचित्र के तीन प्रमुख घटक होते हैं: दूरी, दिशा और प्रतीक।
3.1. दूरी (Distance) – पैमाना (Scale)
- पैमाना मानचित्र और ज़मीन के बीच की दूरी का अनुपात होता है।
- उदाहरण: यदि मानचित्र पर 1 सेंटीमीटर ज़मीन पर 500 किलोमीटर को दर्शाता है, तो यह पैमाना कहलाता है।
- छोटे पैमाने वाले मानचित्र (Small Scale Map): जब बड़े क्षेत्रों (जैसे महाद्वीप, देश) को छोटे कागज़ पर दिखाया जाता है।
- उदाहरण: 1 cm = 500 km
- बड़े पैमाने वाले मानचित्र (Large Scale Map): जब छोटे क्षेत्रों (जैसे गाँव, शहर) को बड़े कागज़ पर दिखाया जाता है।
- उदाहरण: 1 cm = 50 मीटर (ये अधिक जानकारी दर्शाते हैं)।
3.2. दिशा (Direction)
- अधिकांश मानचित्रों में ऊपर की ओर हमेशा उत्तर दिशा (North) दर्शाई जाती है, जिसे उत्तर रेखा (North Line) कहते हैं।
- मुख्य दिशाएँ (Cardinal Directions): उत्तर (N), दक्षिण (S), पूरब (E), पश्चिम (W)।
- मध्यवर्ती दिशाएँ (Intermediate Directions): उत्तर-पूर्व (NE), दक्षिण-पूर्व (SE), दक्षिण-पश्चिम (SW), उत्तर-पश्चिम (NW)।
- दिक्सूचक (Compass): एक उपकरण जिसका उपयोग मुख्य दिशाओं का पता लगाने के लिए किया जाता है।
3.3. प्रतीक (Symbols)
- मानचित्र पर वास्तविक आकार और रूप में इमारतों, सड़कों, पुलों, पेड़ों, और रेलवे लाइनों को दिखाना संभव नहीं है।
- इसलिए, इन्हें अक्षर, छाया, रंग, चित्र और रेखाओं का उपयोग करके दर्शाया जाता है। इन्हें पारंपरिक प्रतीक (Conventional Symbols) कहते हैं
- ये प्रतीक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मान्य होते हैं, जिससे हर कोई इन्हें समझ सकता है।
- उदाहरण: रेलवे लाइन, सड़कें (कच्ची/पक्की), मंदिर, मस्जिद, नदी, कुआँ, कब्रिस्तान आदि के लिए विशिष्ट प्रतीक होते हैं।
4. मानचित्रों के प्रकार (Types of Maps)
मानचित्रों को मुख्य रूप से तीन प्रकारों में बाँटा जाता है:
4.1. भौतिक मानचित्र (Physical Maps)
- ये पृथ्वी की प्राकृतिक विशेषताओं, जैसे पर्वत, पठार, मैदान, नदियाँ, महासागर आदि को दर्शाते हैं।
- इन्हें उच्चावच मानचित्र (Relief Maps) भी कहा जाता है।
4.2. राजनीतिक मानचित्र (Political Maps)
- ये विभिन्न देशों, राज्यों, शहरों, कस्बों और गाँवों की सीमाओं को दर्शाते हैं।
- ये मानव निर्मित प्रशासनिक डिवीजनों (Administrative Divisions) पर ज़ोर देते हैं।
4.3. विषयगत मानचित्र (Thematic Maps)
- ये किसी विशिष्ट जानकारी को दर्शाते हैं।
- उदाहरण: सड़क मानचित्र, वर्षा मानचित्र, वनों के वितरण वाले मानचित्र, उद्योगों के वितरण वाले मानचित्र, जनसंख्या घनत्व मानचित्र आदि।
5. रेखाचित्र और खाका (Sketch and Plan)
5.1. रेखाचित्र (Sketch)
- यह एक मेमोरी या अवलोकन पर आधारित रेखाचित्र है, जो बिना किसी पैमाने (Scale) के खींचा जाता है।
- यह अस्थायी और अनुमानित होता है, जिसका उपयोग किसी स्थान के त्वरित संदर्भ (Quick Reference) के लिए किया जाता है।
- उदाहरण: दोस्त को अपने घर का रास्ता बताने के लिए बनाया गया चित्र।
5.2. खाका (Plan)
- यह एक छोटे क्षेत्र (जैसे एक कमरा, एक इमारत) का बड़े पैमाने पर खींचा गया चित्र है।
- खाका हमेशा एक निश्चित पैमाने के अनुसार बनाया जाता है, इसलिए इसमें छोटी से छोटी जानकारी भी सटीकता के साथ दिखाई जा सकती है।
6. मानचित्र का अध्ययन
- पीला रंग: पठार
- मानचित्र को पढ़ने के लिए, उसके शीर्षक, पैमाने, उत्तर रेखा (दिशा) और प्रतीकों (Symbols) को समझना आवश्यक है।
- मानचित्रों में रंगों का उपयोग भी विशिष्ट होता है, जैसे:
- नीला रंग: जल निकाय (नदी, समुद्र)
- भूरा रंग: पर्वत और उच्च भूमि
- हरा रंग: मैदान और वन क्षेत्र
