जलाते चलो – कक्षा 6 हिंदी मल्हार

पाठ में आये कठिन शब्दों के अर्थ
  1. जलाते चलो – प्रकाशित करना
  2. स्नेह – प्रेम
  3. धरा – धरती
  4. अँधेरा – अँधकार, निराशा, बुराई
  5. निहित – विध्यमान
  6. विश्व – संसार
  7. दिवस – दिन
  8. निशा – रात
  9. विधुत – बिजली
  10. पथ – रास्ता
  11. तिमिर – अँधेरा
  12. चुनौती – ललकार
  13. सरित – नदी
  14. निरंतर – लगातार
  15. शिला – पत्थर, चटान
  16. अनगिनत – जिनकी कोई गिनती न हो
  17. साक्षी – गवाह
  18. पवन – हवा
  19. उजेला – उजाला
  20. लौ – ज्योति, प्रकाश
  21. स्वर्ण-सी – सोने के सामान
  22. निशा – रात
  23. सवेरा – सुबह

पाठ से

मेरी समझ से

(क) नीचे दिए गए प्रश्नों का सटीक उत्तर कौन-सा है? उसके सामने तारा (★) बनाइए-

(1) निम्नलिखित में से कौन-सी बात इस कविता में मुख्य रूप से कही गई है?

  • भलाई के कार्य करते रहना
  • दीपावली के दीपक जलाना
  • बल्ब आदि जलाकर अंधकार दूर करना
  • तिमिर मिलने तक नाव चलाते रहना

उत्तर

भलाई के कार्य करते रहना (★)

(2) “ जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की, चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी” यह वाक्य किससे कहा गया है?

  • तूफ़ान से
  • दीपकों से
  • मनुष्यों से
  • तिमिर से

उत्तर

मनुष्यों से (★)

(ख) अब अपने मित्रों के साथ चर्चा कीजिए और कारण . सहित बताइए कि आपने ये उत्तर ही क्यों चुने?

उत्तर

(1) मैंने ‘भलाई के कार्य करते रहना’ उत्तर इसलिए चुना क्योंकि कविता का शीर्षक भी ‘जलाते चलो’ है। पूरी कविता में बुराई, अनाचार, पाप, लोभ आदि बुराइयों को मिटाकर भलाई के कार्य करने की प्रेरणा दी गयी है।

(2) मैंने ‘मनुष्यों से’ उत्तर इसलिए चुना क्योंकि मानव नेही प्रेम रूपी प्रकाश का दीपक जलाकर ‘तिमिर’ अर्थात अंधकार, बुराइयों आदि की चुनौती को स्वीकार किया था।

मिलकर करें मिलान

कविता में से चुनकर कुछ शब्द यहाँ दिए गए हैं। अपने समूह में इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें इनके सही अर्थों या संदर्भों से मिलाइए। इसके लिए आप शब्दकोश, इंटरनेट या अपने शिक्षकों की सहायता ले सकते हैं।

शब्दअर्थ या संदर्भ
1. अमावस1. पूर्णमासी, वह तिथि जिस रात चंद्रमा पूरा दिखाई देता है।
2. पूर्णिमा2. विद्युत दिये अर्थात बिजली से जलने वाले दीपक, बल्ब आदि उपकरण।
3. विद्युत – दिये3. समय, काल, युग संख्या में चार माने गए हैं- सत्ययुग (सतयुग), त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग ।
4. युग4. अमावस्या, जिस रात आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता ।

उत्तर

शब्दअर्थ या संदर्भ
1. अमावस4. अमावस्या, जिस रात आकाश में चंद्रमा दिखाई नहीं देता ।
2. पूर्णिमा1. पूर्णमासी, वह तिथि जिस रात चंद्रमा पूरा दिखाई देता है।
3. विद्युत – दिये2. विद्युत दिये अर्थात बिजली से जलने वाले दीपक, बल्ब आदि उपकरण।
4. युग3. समय, काल, युग संख्या में चार माने गए हैं- सत्ययुग (सतयुग), त्रेता युग, द्वापर युग और कलियुग ।

पंक्तियों पर चर्चा

कविता में से चुनकर कुछ पंक्तियाँ नीचे दी गई हैं। इन्हें ध्यान से पढ़िए और इन पर विचार कीजिए। आपको इनका क्या अर्थ समझ में आया? अपने विचार अपने समूह में साझा कीजिए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए।

उत्तर

कवि द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी जी ने जीवन की सच्चाई को बहुत सटीक शब्दों और प्रभावमयी भाषा में प्रकट किया है। दिये को ज्ञान, अच्छाई, सत्य, प्रेम, प्रकाश आदि के लिए प्रयोग किया जाता है। दूसरी तरफ तूफ़ान संकट, मुसीबतों, दुराचार, छल-कपट, बुराई आदि को अंधकार का प्रतीक माना जाता है।

अच्छाई और बुराई की कहानी तो युगों-युगों से चलती आ रही है। यह भविष्य में भी चलती रहेगी। असंख्य बार सत्य की असत्य पर, अहिंसा की हिंसा पर अच्छाई की बुराई पर विजय हुई है, किंतु बुराई कभी समाप्त नहीं होती। इसका यह अर्थ तो नहीं है कि अच्छाई अपना मार्ग ही छोड़ दे। सत्य की, त्याग की, प्रेम की जो लौ एक बार जल गई है, वह हमेशा जलती रहेगी। वह सोने के समान अपना उज्ज्वल प्रकाश फैलाती रहेगी। यदि धरती पर प्रेम और सत्य की रक्षा करने वाला, दीपक के समान प्रकाश देने वाला व्यक्ति / समाज रहेगा तो यह तो निश्चित ही है कि कभी तो इस बुराई रूपी रात का सवेरा होगा। अंधकार को मिटाकर ज्ञान व प्रेम पृथ्वी को प्रकाशित करेगा ।

सोच-विचार के लिए

कविता को एक बार फिर से पढ़िए, पता लगाइए और अपनी लेखन पुस्तिका में लिखिए-

(क) कविता में अँधेरे या तिमिर के लिए किन वस्तुओं के उदाहरण दिए गए हैं?

उत्तर

कविता में अँधेरे या तिमिर के लिए अमावस, तूफ़ान, निशा, शिला आदि के उदाहरण दिए गए हैं।

(ख) यह कविता आशा और उत्साह जगाने वाली कविता है। इसमें क्या आशा की गई है ? यह आशा क्यों की गई है?

उत्तर

यह कविता आशा और उत्साह जगाने वाली कविता है। इसमें पृथ्वी से सभी बुराइयों जैसे- अनैतिकता, अज्ञान, निराशा, स्वार्थ, लालच, द्वेष आदि को समाप्त करने तथा इस दिशा में प्रयत्न करने की आशा की गई है।
आशा अच्छे भविष्य की कल्पना करके उसे प्राप्त करने के लिए की जाती है। जब हम इसे अपने जीवन में उतारकर आगे बढ़ना चाहते हैं तो प्रतिकूल परिस्थितियों का सामना करने में इससे मदद मिलती है। इसलिए कवि ने कहा है कि पृथ्वी पर यदि आशा का एक दीपक भी जलता रहेगा तो कभी तो प्रेम और ज्ञान का प्रकाश फैलेगा ।

(ग) कविता में किसे जलाने और किसे बुझाने की बात कही गई है ?

उत्तर

कविता में स्नेह भरा ज्ञान का दीपक जलाने और बुराइयों का अँधेरा मिटाने की बात कही गई है।

कविता की रचना

“जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर
कभी तो धरा का अँधेरा मिटेगा ।”

इन पंक्तियों को अपने शिक्षक के साथ मिलकर लय सहित गाने या बोलने का प्रयास कीजिए। आप हाथों से ताल भी दे सकते हैं। दोनों पंक्तियों को गाने या बोलने में समान समय लगा या अलग-अलग? आपने अवश्य ही अनुभव किया होगा कि इन पंक्तियों को बोलने या गाने में लगभग एक-समान समय लगता है। केवल इन दो पंक्तियों को ही नहीं, इस कविता की प्रत्येक पंक्ति को गाने में या बोलने में लगभग समान समय ही लगता है। इस विशेषता के कारण यह कविता और अधिक प्रभावशाली हो गई है।

आप ध्यान देंगे तो इस कविता में आपको और भी अनेक विशेष बातें दिखाई देंगी।

(क) इस कविता को एक बार फिर से पढ़िए और अपने-अपने समूह में मिलकर इस कविता की विशेषताओं की सूची बनाइए, जैसे इस कविता की पंक्तियों को 2–4, 2-4 के क्रम में बाँटा गया है आदि।

(ख) अपने समूह की सूची को कक्षा में सबके साथ साझा कीजिए।

उत्तर

विद्यार्थी पढ़कर स्वयं कविता की विशेषतओं की सूची बनाएँ और उसे कक्षा में साझा करें।

मिलान

स्तंभ 1 और स्तंभ 2 में कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। मिलते-जुलते भाव वाली पंक्तियों को रेखा खींचकर जोड़िए-

स्तंभ- 1स्तंभ-2
1. कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा।1. विश्व की भलाई का ध्यान रखे बिना प्रगति करने से कोई लाभ नहीं होगा।
2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर ।2. विश्व में सुख-शांति क्यों कम होती जा रही है?
3. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा – सी ।3. विश्व की समस्याओं से एक न एक दिन छुटकारा अवश्य मिलेगा।
4. बिना स्नेह विद्यत-दिये जल रहे जो बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।4. दूसरों के सुख-चैन के लिए प्रयास करते रहिए।

उत्तर

स्तंभ- 1स्तंभ-2
1. कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा।3. विश्व की समस्याओं से एक न एक दिन छुटकारा अवश्य मिलेगा।
2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर ।4. दूसरों के सुख-चैन के लिए प्रयास करते रहिए।
3. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा – सी ।2. विश्व में सुख-शांति क्यों कम होती जा रही है?
4. बिना स्नेह विद्यत-दिये जल रहे जो बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।1. विश्व की भलाई का ध्यान रखे बिना प्रगति करने से कोई लाभ नहीं होगा।

अनुमान या कल्पना से

अपने समूह में मिलकर चर्चा कीजिए-

(क) “ दिये और तूफ़ान की यह कहानी
चली आ रही और चलती रहेगी”

दीपक और तूफ़ान की यह कौंन – सी कहानी हो सकती है जो सदा से चली आ रही है?

उत्तर

दिये और तूफ़ान की कहानी से अभिप्राय-अमीर-गरीब, सत्य-असत्य, हिंसा – अहिंसा, पाप-पुण्य आदि अच्छाई और बुराई से है।
अच्छाइयों और बुराइयों का टकराव होना स्वाभाविक है। इनके टकराव की कहानी युगों-युगों से चली आ रही है और आगे भी ऐसे ही चलती रहेगी।

(ख) “जली जो प्रथम बार लौ दीप की
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी”

दीपक की यह सोने जैसी लौ क्या हो सकती है जो अनगिनत सालों से जल रही है?

उत्तर

दीपक की यह सोने जैसी लौ आशा और उम्मीद का प्रतीक है। यह लौ अनगिनत सालों से जल रही है। हमारा जीवन अच्छे भविष्य की आशा का सहारा लेकर ही चलता है। यदि किसी कारणवश किसी की आशा और उम्मीद समाप्त हो जाए तो वह व्यक्ति सकारात्मक विचारों को छोड़कर निराशावादी बन जाता है। ऐसा व्यक्ति शारीरिक और मानसिक रूप से बीमार हो जाता है। इसलिए सभी के जीवन में आशा और उम्मीद की लौ जलाना और जलना दोनों आवश्यक है चाहे वह लौ मंद-मंद ही जले।

शब्दों के रूप

“कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा – सी”
‘अमावस’ का अर्थ है ‘अमावस्या’। इन दोनों शब्दों का अर्थ तो समान है लेकिन इनके लिखने-बोलने में थोड़ा-सा अंतर है। ऐसे ही कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। इनसे मिलते-जुलते दूसरे शब्द कविता से खोजकर लिखिए। ऐसे ही कुछ अन्य शब्द आपस में चर्चा करके खोजिए और लिखिए।

1. दिया – _____
2. उजेला – _____
3. अनगिन – _____
4. सरित – ______
5. धरा – _____
6. स्वर्ण – _____

उत्तर

1. दिया – “दीप”
2. उजेला – “उजाला”
3. अनगिन – “अनगिनत”
4. सरित – “सरिता”
5. धरा – “धरती”
6. स्वर्ण – “सोना”

अर्थ की बात

(क) “जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर”

इस पंक्ति में ‘चलो’ के स्थान पर ‘रहो’ शब्द रखकर पढ़िए। इस शब्द के बदलने से पंक्ति के अर्थ में क्या अंतर आ रहा है? अपने समूह में चर्चा कीजिए ।

उत्तर

“जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर” पंक्ति में ‘चलो’ के स्थान पर ‘रहो’ शब्द रखकर पढ़ने से पंक्ति के अर्थ में बदलाव आ जाता है। ‘जलाते चलो’ से अभिप्राय है कि आप जा रहे है। स्नेह भर-भर के दीपक जलाते चलो किंतु ‘ रहो’ शब्द का प्रयोग करने से कार्य की निरंतरता का बोध हो रहा है। अर्थात आप हमेशा ही स्नेह के दिये जलाते रहें। यह प्रक्रिया रुके नहीं, सतत चलती रहे।

(ख) कविता में प्रत्येक शब्द का अपना विशेष महत्व होता है। यदि वे शब्द बदल दिए जाएँ तो कविता का अर्थ भी बदल सकता है और उसकी सुंदरता में भी अंतर आ सकता है।

नीचे कुछ पंक्तियाँ दी गई हैं। पंक्तियों के सामने लगभग समान अर्थों वाले कुछ शब्द दिए गए हैं। आप उनमें से वह शब्द चुनिए, जो उस पंक्ति में सबसे उपयुक्त रहेगा-

1. बहाते चलो _________ तुम वह निरंतर । (नैया, नाव, नौका)
कभी तो तिमिर का _________ मिलेगा। (तट, तीर, किनारा)

2. रहेगा _________ पर दिया एक भी यदि (धरा, धरती, भूमि)

कभी तो निशा को _________ मिलेगा। (प्रातः, सुबह, सवेरा)

3. जला दीप पहला तुम्हीं ने _________ की (अंधकार, तिमिर, अँधेरे)
चुनौती _________ बार स्वीकार की थी। (प्रथम, अव्वल, पहली)

उत्तर

1. बहाते चलो नौका तुम वह निरंतर । कभी तो तिमिर का किनारा मिलेगा ।।
2. रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।
3. जला दीप पहला तुम्हीं ने अंधकार की चुनौती पहली बार स्वीकार की थी।

प्रतीक

(क) “कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा”
निशा का अर्थ है – रात।
सवेरा का अर्थ है – सुबह ।
आपने अनुभव किया होगा कि कविता में इन दोनों शब्दों का प्रयोग ‘रात’ और ”सुबह’ लिए नहीं किया गया है। अपने समूह में चर्चा करके पता लगाइए कि ‘निशा’ और ‘सवेरा’ का इस कविता में क्या-क्या अर्थ हो सकता है।
(संकेत— निशा से जुड़ा है ‘अँधेरा’ और सवेरे से जुड़ा है ‘उजाला’)

उत्तर

इस पंक्ति में निशा का अर्थ ‘रात’ और सवेरा का अर्थ ‘सुबह’ के रूप में नहीं किया गया है। अपितु निशा का प्रयोग दुख, बुराई, अंधकार जैसी खराब प्रवृत्तियों के लिए किया गया है। निशा का प्रयोग नकारात्मक संदर्भ में किया गया है जबकि सवेरा शब्द उजाला अर्थात सकारात्मक सोच जैसे कार्यों के संदर्भ में किया गया है।

(ख) कविता में से चुनकर कुछ शब्द नीचे दिए गए हैं। अपने समूह मिलकर इन पर चर्चा कीजिए और इन्हें उपयुक्त स्थान पर लिखिए।

उत्तर

सवेरानिशा
1. उजेला1. शिला
2. पूर्णिमा2. अँधेरा
3. दिवस3. अमावस
4. स्वर्ण4. तूफ़ान
5. नाव5. दिये
6. किनारा6. तिमिर
7. ज्योति7. लौ
8. जलना8. बुझना

(ग) अपने समूह में मिलकर ‘निशा’ और ‘सवेरा’ के लिए कुछ और शब्द सोविए और लिखिए।
(संकेत – निचे दिए गए चित्र देखिए और इन पर विचार कीजिए ।)

उत्तर

1. सूर्योदय1. प्रभातकाल
2. अमावस्या की रात्रि2. रजनी की सुंदरता
3. सुबह की ताजगी3. उषां-सौंदर्य
4. पूर्णिमा की रात्रि4. बादलों भरी यामिनी

पंक्ति से पंक्ति

“जला दीप पहला तुम्हीं ने तिमिर की
चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी”

कविता की इस पंक्ति को वाक्य के रूप में इस प्रकार लिख सकते हैं-
“तुम्हीं ने पहला दीप जला तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी”
अब नीचे दी गई पंक्तियों को इस प्रकारे वाक्यों के रूप में लिखिए-

कविता की इस पंक्ति को वाक्य के रूप में इस प्रकार लिख सकते हैं-
“तुम्हीं ने पहला दीप जला तिमिर की चुनौती प्रथम बार स्वीकार की थी ।”

अब नीचे दी गई पंक्तियों को इसी प्रकार वाक्यों के रूप में लिखिए-

1. बहाते चलो नाव तुम वह निरंतर ।
2. जलाते चलो ये दिये स्नेह भर-भर ।
3. बुझाओ इन्हें, यों न पथ मिल सकेगा।
4. मगर विश्व पर आज क्यों दिवस ही में घिरी आ रही है अमावस निशा-सी।

उत्तर

1. तुम स्नेह से भरे दीपकों की नाव अर्थात प्रयास निरंतर करते चलो, कभी तो इसे अंधकार का किनारा अर्थात इसके समाप्त होने का स्थान मिलेगा। कभी तो प्रयास सफल होगा।

2. विश्व में प्रेम बढ़ाने के लिए तुम इनमें स्नेह रूपी तेल को भर-भर कर जलाते चलो।

3. इन प्रेम–विहीन बिजली के दियों को बुझाकर प्रेम रस से भरे हुए दिये जलाओ, तभी जीवन का सुनहरा मार्ग मिलेगा।

4. आज ईर्ष्या, द्वेष, स्वार्थ आदि बुरी प्रवृत्तियों के बढ़ने के कारण विश्व में सुख-शांति कम हो रही है और विश्व युद्ध की विभीषिका की ओर बढ़ रहा है।

सा/सी/से का प्रयोग

“घिरी आ रही है अमावस निशा-सी
स्वर्ण-सी जल रही और जलती रहेगी”

इन पंक्तियों में कुछ शब्दों के नीचे रेखा खिंची है। इनमें ‘सी’ शब्द पर ध्यान दीजिए। यहाँ ‘सी’ शब्द समानता दिखाने के लिए प्रयोग किया गया है। ‘सा/ सी / से’ का प्रयोग जब समानता दिखाने के लिए किया जाता है तो इनसे पहले योजक चिह्न (–) का प्रयोग किया जाता है।

अब आप भी विभिन्न शब्दों के साथ ‘सा/ सी / से’ का प्रयोग करते हुए अपनी कल्पना से पाँच वाक्य अपनी लेखन – पुस्तिका में लिखिए।

उत्तर

1. वह लाल किरण-सी चोंच खोल कर खा रहा था ।

2. उसका हृदय नील गगन-सा शांत था ।

3. हरि के पद कोमल कमल-से हैं।

4. उसका हृदय सागर-सा गंभीर है।

5. गंगा-जल अमृत-सा होता है।

पाठ से आगे

आपकी बात

(क) “रहेगा धरा पर दिया एक भी यदि
कभी तो निशा को सवेरा मिलेगा।”

यदि हर व्यक्ति अपना कर्तव्य समझ ले और दूसरों की भलाई के लिए कार्य करे तो पूरी दुनिया सुंदर बन जाएगी। आप भी दूसरों के लिए प्रतिदिन बहुत-से अच्छे कार्य करते होंगे। अपने उन कार्यों के बारे में बताइए ।

उत्तर

मेरे द्वारा किए जाने वाले कुछ अच्छे कार्य-

  • मैं प्रातःकाल उठकर अपने घर के बड़ों के चरण-स्पर्श करता हूँ।
  • इसके पश्चात नहा-धोकर मैं घर के पौधों को पानी देता हूँ।
  • विद्यालय से आकर मैं अपना लंच बॉक्स और पानी की बोतल रसोई घर में रखता हूँ।
  • हमारे घर के पास एक वृद्ध आश्रम है। मेरी माँ और हम दोनों भाई-बहन वहाँ जाकर कुछ समय उन लोगों के साथ व्यतीत करते हैं।
  • शाम के समय मैं अपनी माँ के गृह कार्य में मदद करता हूँ। रात के समय सभी के कमरों में पानी रखकर आना मेरा काम है।

(ख) इस कविता में निरश न होने, चुनौतियों का सामना करने और सबके सुख के लिए कार्य करने के लिए प्रेरित किया गया है। यदि आपको अपने किसी मित्र को निराश न होने के लिए प्रेरित करना हो तो आप क्या करेंगे? क्या कहेंगे? अपने समूह में बताइए ।

उत्तर

मेरी ही कक्षा में पढ़ने वाला मेरा मित्र अमित काफी समय से विद्यालय नहीं आ रहा था । अध्यापिका से पूछने पर पता चला कि उसके पापा काफ़ी समय से बीमार चल रहे थे। बीमारी के चलते वे अपने व्यापार पर ध्यान नहीं दे पाए और उनके व्यापार के साझीदार उनके मित्र ने ही उन्हें धोखा दे दिया। नया सत्र आरंभ हुए दो महीने हो गए थे। नए पाठ्यक्रम का अमित को कुछ पता नहीं था। वह काफी होनहार छात्र है। विद्यालय की प्रधानाध्यापिका जी ने उसकी फ़ीस माफ़ कर दी। पुस्तकों व अन्य सामान हम सहपाठियों ने उसे लेकर दे दिए। अपने पिता की बीमारी के कारण वह जीवन से निराश हो गया था। हमारे अध्यापक मंडल व हम मित्रों ने उसका हौंसला बढ़ाया। जो पाठ्यक्रम हो चुका था, उसकी फोटो कॉपी करवा कर हमने उसे दी। वह मेरे घर के पास ही रहता है। मेरे पापा हम दोनों को विद्यालय छोड़कर आते हैं और लाते भी हैं। मेरे पापा ने मुझे कुछ पुस्तकें लाकर दी थीं, जिनमें संकट के समय हार न मानने की प्रेरणा दी गई है। मैं प्रतिदिन उन पुस्तकों की कुछ पंक्तियाँ अमित को समझाता हूँ और लिखकर भी देता हूँ। अब उसके पापा काफ़ी ठीक हो गए हैं। मेरे मित्र में भी हिम्मत का संचार हो रहा है।

(ग) क्या आपको कभी किसी ने कोई कार्य करने के लिए प्रेरित किया है? कब? कैसे? उस घटना के बारे में बताइए।

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।

अमावस्या और पूर्णिमा

(क) “भले शक्ति विज्ञान में है निहित वह कि जिससे अमावस बने पूर्णिमा-सी”

आप अमावस्या और पूर्णिमा के बारे में पहले ही पढ़ चुके हैं। क्या आप जानते हैं कि अमावस्या और पूर्णिमा के होने का क्या कारण है?

आप आकाश में रात को चंद्रमा अवश्य देखते होंगे। क्या चंद्रमा प्रतिदिन एक-सा दिखाई देता है? नहीं। चंद्रमा घटता-बढ़ता दिखाई देता है। आइए जानते हैं कि ऐसा कैसे होता है।

आप जानते ही हैं कि चंद्रमा पृथ्वी की परिक्रमा करता है जबकि पृथ्वी सूर्य की । आप यह भी जानते हैं कि चंद्रमा का अपना कोई प्रकाश नहीं होता। वह सूर्य के प्रकाश से ही चमकता है। लेकिन पृथ्वी के कारण सूर्य के कुछ प्रकाश को चंद्रमा तक जाने में रुकावट आ जाती है। इससे पृथ्वी की छाया चंद्रमा पर पड़ती है, जो प्रतिदिन घटती-बढ़ती रहती है। सूरज का जो प्रकाश बिना रुकावट चंद्रमा तक पहुँच जाता है, उसी से चंद्रमा चमकदार दिखता है। इसी छाया और उजले भाग की आकृति में आने वाले परिवर्तन को चंद्रमा की कला कहते हैं।

चंद्रमा की कला धीरे-धीरे बढ़ती रहती है और पूर्णिमा की रात चंद्रमा पूरा है। इसके बाद कला धीरे-धीरे घटती रहती है और अमावस्या वाली रात चाँद दिखाई नहीं देता। चंद्रमा की कलाओं के घटने के दिनों को ‘कृष्ण पक्ष’ को कहते हैं। ‘कृष्ण’ शब्द का एक अर्थ काला भी है। इसी प्रकार चंद्रमा की कलाओं के बढ़ने के दिनों को ‘शुक्ल पक्ष’ कहते हैं। ‘शुक्ल’ शब्द का एक अर्थ ‘उजला’ भी है।

उत्तर

विद्यार्थी स्वयं करें।

(ख) अब नीचे दिए गए चित्र में अमावस्या, पूर्णिमा, कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष को पहचानिए और ये नाम उपयुक्त स्थानों पर लिखिए-
(यदि पहचानने में कठिनाई हो तो आप अपने शिक्षक, परिजनों या इंटरनेट की सहायता भी ले सकते हैं।)

उत्तर

संकेत – पाठयपुस्तक के पृष्ठ-71 पर दिए गए चित्र – पहली की दो पंक्तियाँ शुक्ल पक्ष की तथा अंतिम दो पंक्तियाँ कृष्ण पक्ष को दर्शा रही हैं।

तिथिपत्र

आपने तिथिपत्र (कैलेंडर ) अवश्य देखा होगा। उसमें साल के सभी महीनों की तिथियों की जानकारी दी जाती है।
नीचे तिथिपत्र के एक महीने का पृष्ठ दिया गया है। इसे ध्यान से देखिए और प्रश्नों के उत्तर दीजिए-

(तिथिपत्र के एक महीने के पृष्ठ के लिए पाठ्यपुस्तक का पेज 72 देखें।)

(क) दिए गए महीने में कुल कितने दिन हैं?
(ख) पूर्णिमा और अमावस्या किस दिनांक और वार को पड़ रही है?
(ग) कृष्ण पक्ष की सप्तमी और शुक्ल पक्ष की सप्तमी में कितने दिनों का अंतर है ?
(घ) इस महीने में कृष्ण पक्ष में कुल कितने दिन हैं ?
(ङ) ‘वसंत पंचमी’ की तिथि बताइए ।

उत्तर

(क) दिए गए महीने में कुल 31 दिन हैं।

(ख) पूर्णिमा – दिनांक 6 जनवरी शुक्रवार को पड़ रही है। अमावस्या – दिनांक 21 जनवरी शनिवार को पड़ रही है।

(ग) कृष्ण पक्ष की सप्तमी और शुक्ल पक्ष की सप्तमी में चौदह दिन का अंतर है।

(घ) इस महीने में कृष्ण पक्ष में कुल 15 दिन हैं।

(ङ) वसंत पंचमी 26 जनवरी की है।

आज की पहेली

“समय साक्षी है कि जलते हुए दीप
अनगिन तम्हारे पवन ने बुझाए ।”

‘पवन’ शब्द का अर्थ है हवा ।
नीचे एक अक्षर – जाल दिया गया है। इसमें ‘पवन’ के लिए उपयोग किए जाने वाले अलग-अलग नाम या शब्द छिपे हैं। आपको उन्हें खोजकर उन पर घेरा बनाना है, जैसा एक हमने पहले से बना दिया है। देखते हैं, आप कितने सही नाम या शब्द खोज पाते हैं।

उत्तर

पवन, मारुत, बयार, समीर, हवा, वायु, वात, अनिल ।

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