जीवों में जनन (REPRODUCTION IN ORGANISMS)

पुरानी पीढ़ी के द्वारा अपनी ही तरह के नयी पीढ़ियों के उत्पादन या जन्म देने की प्रक्रिया प्रजनन (Reproduction) कहलाती है। प्रजनन जीवों की निरन्तरता को पीढ़ी-दर-पीढ़ी बनाए रखने के लिए आवश्यक है।

सभी जीव वयस्कता को प्राप्त करने के बाद जनन की क्रिया का सम्पादन करते हैं तथा बनने वाली हर नई संतति पहले छोटी होती है, जिसे शैशवावस्था कहते हैं। जो कि विकास, वृद्धि एवं परिपक्वन द्वारा अपने मूल जनक की तरह अर्थात् वयस्क में परिवर्धित हो जाता है। पीढ़ी-दर-पीढ़ी प्रजनन की क्रिया का सम्पादन करके जीव अपनी जनसंख्या में संख्यात्मक अभिवृद्धि करता रहता है।

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जीवन अवधि (Life Span) –

प्रत्येक जीव केवल एक निश्चित काल जीवित रहता है इसके पश्चात् प्राकृतिक मृत्यु को प्राप्त करता है। किसी जीव के जन्म से लेकर प्राकृतिक मृत्यु को प्राप्त करने तक का समय काल, जीवन अवधि (Life Span) कहलाता है। यह एक दिन अथवा 4000 वर्ष तक का भी हो सकता है।

कौआ एवं तोता लगभग एक जैसे आकार के होते हैं परन्तु कौआ का जीवन काल केवल 15 वर्ष होता है जबकि तोता 140 वर्ष तक जिंदा रहता है। इसी प्रकार आम के पेड़ की जीवन अवधि 200 वर्ष जबकि पीपल (Ficus religiosa) का जीवन काल 2500 वर्ष होता है। बरगद का पेड़ आकार में अति विशाल, फैला हुआ होता है, परन्तु इनका जीवन अवधि केवल 500 वर्ष होता है।

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कौन सा जीव अमर कहा जाता है ?

अमीबा (Amoeba) एक कोशिकीय जीव है, इसे अमर कहा जाता है।

अमीबा को अमर जीव क्यों कहते हैं ?

binary fission in Amoeba

अमीबा की वृद्धि के साथ उनका द्विविभाजन (Binary fission) हो जाता है और इससे जनक कोशिका (Parent cell/ Mother cell) दो पुत्री कोशिकाओं (Daughter cells) में विभाजित हो जाती है। इस प्रकार इन जीवों में मृत होने योग्य कोई शेष भाग नहीं रह जाता।

प्रजनन के आधारभूत लक्षण (Fundamental characters of reproduction)

प्रजनन के आधारभूत लक्षण निम्नलिखित हैं-

(i) प्रजनन से पहले जनन कोशिका में DNA प्रतिलिपिकरण होता है तथा इसमें RNA एवं प्रोटीन संश्लेषण की क्रिया भी संपादित होती है।
(ii) केवल समसूत्री या फिर अर्द्धसूत्री तथा समसूत्री विभाजनों के द्वारा जनन कोशिका विभाजित होती है।

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(iii) प्रजनन के लिए जननीय रचनाओं (Reproductive bodies) या इकाइयों का निर्माण।

(iv) जननीय रचनाओं या इकाइयों द्वारा अंततः नए संतति का निर्माण करना।

प्रजनन के प्रकार (Types of Reproduction) –

प्रजनन प्रक्रिया दो प्रकार की होती है: अलैंगिक (Asexual) एवं लैंगिक (Sexual) प्रजनन ।

अलैंगिक /असाहवासिक (Asexual) प्रजनन

अलैंगिक प्रजनन में युग्मक निर्माण (gametogenesis) एवं युग्मक संलयन (gametes fusion) नहीं होता है, तथा यह एक जनकीय (uniparental) होता है। यह एक जनक द्वारा बिना युग्मक निर्माण तथा निषेचन के ही संतति को उत्पन्न किए जाने की प्रक्रिया है। ये आकारिकी तथा आनुवांशिकी रूप से समान होती है। ऐसे समान-जीवों को क्लोन (Clone) भी कहा जाता है। इसे अयुग्मक जनन (Agamogeny) या कायिक जनन (Somatogamy) भी कहते हैं।

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द्विविभाजन ( Binary Fission) –

इसके अंतर्गत या तो जीव किसी भी तल से दो बराबर भागों में द्विविभाजन (Binary fission) करते हैं या अनुप्रस्थ विभाजन (उदाहरण पैरामीशियम) या अनुदैर्ध्य विभाजन (उदाहरण – यूग्लीना) द्वारा दो या दो से अधिक संतति कोशिकाओं का जनक कोशिका से निर्माण करते हैं।

लैंगिक (Sexual) प्रजनन

लैंगिक प्रजनन (Sexual reproduction) में युग्मक निर्माण तथा युग्मक संलयन होता है। इसमें युग्मक विपरीत लिंगों से आते हैं। यह द्विजनकीय (Biparental) होता है जिसमें दो विपरीत लिंगो से संबंधित जनक भाग लेते हैं।

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